राष्ट्रीय खेल घोटाला : सरकारी अधिकारियों की अकर्मण्यता से आरके आनंद के खिलाफ केस हुआ कमज़ोर
sportsjharkhand.com टीम रांची
2020-01-02
राज्य सरकार के विधि विभाग के दिनांक 19 जुलाई 2019 के आदेश (आदेश संख्या झा.-विधि-अभि.-स्वी.-100/2019-103/जे) के जरिये रामकुमार आनंद (आरके आनंद) के खिलाफ राष्ट्रीय खेल घोटाले में अभियोजन की स्वीकृति दी गई। लेकिन इसी आदेश के 15 शब्दों की बदौलत राष्ट्रीय खेल आयोजन समिति (NGOC) के कार्यकारी अध्यक्ष आरके आनंद के खिलाफ पूरा केस कमज़ोर पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। ये 15 शब्द हैं


 ...ऐसे लोक सेवक हैं, जो सरकार की मंजूरी पर ही सेवा से हटाए जा सकते हैं... 


 ये 15 शब्द भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 19(1)(b) के आधार पर लिखे गए हैं, जो कहता है 


Sanction can be granted only by the Government in case the person is removable from the office with the sanction of the State Government.


उपरोक्त 15 शब्दों के आधार पर ही आरके आनंद के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति दी गई, जो पूर्णतः गलत है। ये हम नहीं राष्ट्रीय खेल आयोजन से जुड़े सरकारी दस्तावेज कह रहे हैं। 




क्या कहता है होस्ट सिटी कॉन्ट्रैक्ट व NGOC का MoA 


 राज्य सरकार, IOA व JOA के बीच 26 जून 2006 को हुए होस्ट सिटी कॉन्ट्रैक्ट, खेल विभाग की अधिसूचना (संख्या-2/खेल-1-कला-23/06-2013 दिनांक 29.10.2007) व 14 मई 2008 को IG रजिस्ट्रार के यहां निबंधित समिति के दस्तावेज विधि विभाग के इस आधार को पूर्णतः खारिज़ करते हैं। उपरोक्त तीनों दस्तावेजों के अनुसार झारखंड ओलंपिक संघ (JOA) का अध्यक्ष ही राष्ट्रीय खेल आयोजन समिति (NGOC) का कार्यकारी अध्यक्ष होगा।और JOA के अध्यक्ष का चयन संघ जुड़े खेल संघ के पदाधिकारी करते हैं न की राज्य सरकार का कोई विभाग। मतलब साफ है कि जिस आधार पर आर के आनंद को लोकसेवक बताकर अभियोजन की स्वीकृति दी गई है वो पूर्णतः गलत है। 




कोर्ट में टांय-टांय फिस्स हो जाएगा आरोप


 आरके आनंद के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति का आधार गलत होने के कारण जब कोर्ट में मामले पर बहस होगी तो अभियोजन पक्ष को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। आरके आनंद जैसे आरोपी के खिलाफ अभियोजन पक्ष की ये खामियां काफी महंगी पड़ सकती हैं।




अधिकारियों की अकर्मण्यता 


 कुल मिलाकर खेल विभाग और विधि विभाग के अधिकारियों ने गलत तथ्यों के आधार पर आरके आनंद के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति दे दी। अधिकारियों की अकर्मण्यता के कारण इस हाई प्रोफाइल मामले में एक प्राथमिकी अभियुक्त के खिलाफ मामला उल्टा पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है।