...एक टेस्ट... स्#@ला... एक टेस्ट... JSCA के क्रिकेटरों का करियर खत्म कर देता है... रमेश सक्सेना, सुब्रतो बनर्जी के बाद अब शाहबाज़ नदीम की बारी !
sportsjharkhand.com टीम रांची
2019-10-24

एक टेस्ट और करियर खत्म ! सुनने समझने में थोड़ा अटपटा लग रहा होगा लेकिन झारखंड के टेस्ट क्रिकेटरों और एक टेस्ट मैच का दुर्योग 52 साल से पीछा छोड़ने का नाम ही नहीं ले रहा। गुरुवार को बांग्लादेश के खिलाफ होनेवाले टेस्ट मैचों के लिए भारतीय टीम की घोषणा ने इस दुर्योग को एक नई हवा दे दी है। इस टीम से शाहबाज़ नदीम का नाम गायब है, वही शाहबाज़ नदीम जिन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीसरे और आखिरी टेस्ट में अपने टेस्ट करियर का आगाज़ किया था। 31वें बसंत में पहुंचे क्रिकेटर को जब टीम से बाहर किया जाता है तो साधारणतः ये समझा जाता है कि उस क्रिकेटर का अंतरराष्ट्रीय करियर खत्म हो गया है। ऐसे में ये चर्चा लाज़िमी है कि क्या शाहबाज़ नदीम का भी टेस्ट करियर खत्म हो गया है ? सवाल का जवाब तो भविष्य के गर्भ में है लेकिन इतिहास के पन्ने इसी अनहोनी की आशंका की ओर इशारा कर रहे हैं। 1935 में बने झारखंड राज्य क्रिकेट संघ (JSCA) से 84 वर्षों में अब तक कुल 5 क्रिकेटरों को ही टेस्ट मैच खेलने का अवसर मिला है। इनमें से सिर्फ दो क्रिकेटर महेंद्र सिंह धौनी 90 टेस्ट और वरुण एरोन 9 टेस्ट मैच खेल चुके हैं, बाकी तीन टेस्ट क्रिकेटरों रमेश सक्सेना, सुब्रतो बनर्जी व शाहबाज़ नदीम को एक-एक टेस्ट मैच से ही संतोष करना पड़ा है।




नदीम के अगले साल मई तक टेस्ट खेलने के आसार नहीं


भारतीय टीम और बेंच स्ट्रेंथ पर ध्यान दें तो बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाजों में रविन्द्र जडेजा व कुलदीप यादव के बाद नदीम का नंबर आता है। बांग्लादेश के खिलाफ टीम में नदीम को जगह नहीं मिली है। अगली टेस्ट श्रृंखला न्यूजीलैंड के खिलाफ न्यूजीलैंड में है, जहां मैच में 3 स्पिनर की जगह संभव नहीं है क्योंकि सीमिंग विकेट ज्यादा हैं। मतलब नदीम के लिए संभावना क्षीण नज़र आती है। ऐसे में टेस्ट मैचों में नदीम के लिए अच्छी खबर अगले साल मई तक तो नज़र नहीं आती। क्योंकि जब भारत मे बांग्लादेश के खिलाफ मौका नहीं मिला तो न्यूज़ीलैंड में मौका मिलना इतना आसान नहीं होगा।



एक टेस्ट मैच और JSCA के क्रिकेटरों का दुर्योग


नदीम के टेस्ट करियर खत्म होने की आशंका के बीच ये जानना रोचक होगा कि नदीम से पहले।JSCA के कितने क्रिकेटरों का करियर एक टेस्ट मैच के बाद ही खत्म हो गया ? 


रमेश सक्सेना 1967 हेडिंगले, इंग्लैंड

इसका पहला उदाहरण 1967 में इंग्लैंड दौरे पर गए रमेश सक्सेना रहे। 8 से 13 जून तक हेडिंगले में खेले गए पहले टेस्ट में रमेश ने दो पारियों में 25 रन बनाए। पहली पारी में सलामी बल्लेबाज के तौर पर 9 और दूसरी पारी में सातवें नंबर पर खेलते हुए 16 रन। गेंदबाज़ी भी की लेकिन विकेट नहीं मिला। इसके बाद 1967-68 में ही ऑस्ट्रेलिया-न्यूज़ीलैंड के दौरे पर भी रमेश टीम में रहे लेकिन पर्यटक के तौर पर। इसके बाद करियर खत्म।


सुब्रतो बनर्जी 1992 सिडनी, ऑस्ट्रेलिया


2-6 जनवरी तक खेले गए तीसरे टेस्ट में सुब्रतो बनर्जी ने टेस्ट में अपना पदार्पण किया। मैच के पहले दिन ऑस्ट्रेलिया के 3 विकेट गिरे और तीनों ही सुब्रतो ने लिए। बल्लेबाज़ी करते हुए 3 रन बनाए। इसके बाद दोबारा टेस्ट का मुंह नहीं देख पाए।



रमेश सक्सेना-सुब्रतो बनर्जी-शाहबाज़ नदीम के खेल गए टेस्ट मैच में कई संयोग भी हैं, जिनमे से प्रमुख हैं


# रमेश सक्सेना, सुब्रतो बनर्जी व शाहबाज़ नदीम ने टेस्ट मैच में बल्लेबाजी व गेंदबाज़ी दोनों की। रमेश सलामी बल्लेबाज थे लेकिन उनसे नवाब पटौदी ने दो ओवर गेंदबाज़ी भी कराई


# तीनों ही टेस्ट मैच में एक बल्लेबाज ने दोहरा शतक लगाया। 1967 में जेफरी बॉयकॉट, 1992 में रवि शास्त्री व 2019 में रोहित शर्मा


# दोहरे शतक लगानेवाले तीनों बल्लेबाजों ने सलामी बल्लेबाज की भूमिका निभाई थी


# जिस टीम की ओर से दोहरा शतक लगा वो टीम तीनों मैच नहीं हारी। बॉयकॉट-रोहित विजयी टीम का हिस्सा रहे जबकि शास्त्री ड्रा का हिस्सा बने 


# रमेश सक्सेना व सुब्रतो बनर्जी ने 23-23 वर्ष की उम्र में पदार्पण किया जबकि नदीम ने 31 वर्ष की उम्र में


# रमेश सक्सेना व सुब्रतो बनर्जी ने विदेशी धरती पर डेब्यू किया जबकि शाहबाज़ नदीम ने होम टर्फ पर


# तीनों का पैतृक गांव झारखंड में नहीं था/है। रमेश सक्सेना दिल्ली आसपास, सुब्रतो बनर्जी पश्चिम बंगाल और शाहबाज़ नदीम का पैतृक आवास बिहार में है