फर्ज़ी इनवॉइस पर करार की शर्तों के प्रतिकूल NGOC ने आईकैच को किया 1.5 करोड़ रुपये का भुगतान

2019-07-12

राष्ट्रीय खेल घोटाले की ऐसी सच्चाई, जो 9 वर्षों में एसीबी भी नहीं ढूंढ पाई - 4

रांची


राष्ट्रीय खेल घोटालों में पिछले 11 वर्षों के दौरान आपने घपले घोटाले की तरह तरह की खबरें पढ़ीं होंगी। लेकिन आज हम इस मामले से जुड़ा सबसे बड़ा खुलासा करने जा रहे हैं। साईनेज़ का काम कर रही कंपनी आईकैच व राष्ट्रीय खेल आयोजन समिति (NGOC) के पदाधिकारियों की मिलीभगत से फ़र्ज़ी इनवॉइस पर 1.5 करोड़ रूपये का भुगतान कर दिया गया। NGOC की फ़ाइल 42/2008 और 01/2009 के दस्तावेज बताते हैं कि अज्ञात कारणों से सिर्फ और सिर्फ नियमों से परे जाकर भुगतान करने के लिए फ़र्ज़ी इनवॉइस का इस्तेमाल किया गया था। फ़ाइल संख्या 01/2009 के पहले पन्ने पर NGOC के कोषाध्यक्ष मधुकांत पाठक ने 

दिनांक 12-1-2009 को जारी Invoice No. 002/CST/08-09 का बिल 46,20,170 रुपये, 

दिनांक 16.1.2009 को जारी Invoice No. 003/CST/08-09 का बिल 49,17,900 रुपये, 

दिनांक 19.1.2009 को जारी Invoice No. 004/CST/08-09 का बिल 43,63,820 रुपये

दिनांक 19.1.2009 को जारी Invoice No. 005/CST/08-09 का बिल 40,79,688 रुपये और

दिनांक 19.1.2009 को जारी Invoice No. 006/CST/08-09 का बिल 28,14,618 रुपये बताते हुए कुल 2,07,96,196 रुपये में से टैक्स का पैसे पर बाद में विचार करने और आइकैच की आर्थिक तकलीफों को ध्यान में रखते हुए 1.5 करोड़ रुपये के भुगतान को स्वीकृति देने का प्रस्ताव रखते हैं। जिसे उसी दिन NGOC के निदेशक पीसी मिश्रा और सचिव आर एस वर्मा (अब स्वर्गीय) ने  मंजूरी दे दी और कंपनी को 1.5 करोड़ रुपये के चेक संख्या 409503 का भुगतान भी हो गया (देखें तस्वीर)। 


लेकिन पांच महीने बाद 15 जून 2009 को आइकैच की ओर से NGOC को जो फाइनल बिल भेजा गया उसमें  

दिनांक 12.1.2009 को जारी Invoice No. 001/CST/08-09 का बिल 7,87,500 रुपये, 

दिनांक 12.1.2009 को जारी Invoice No. 002/CST/08-09 का बिल 7,87,500 रुपये, 

दिनांक 16.1.2009 को जारी Invoice No. 003/CST/08-09 का बिल 5,62,500 रुपये, 

दिनांक 30.1.2009 को जारी Invoice No. 004/CST/08-09 का बिल 8,43,750 रुपये

दिनांक 16.2.2009 को जारी Invoice No. 005/CST/08-09 का बिल 17,02,288 रुपये

दिनांक 15.6.2009 को जारी Invoice No. 006/CST/08-09 का बिल 2,19,11,462 रुपये बताया गया है (देखें तस्वीर)। 


इतने रुपयों का अंतर देखकर जब हमने तफ्तीश की तो पता चला कि NGOC के इंटरनल आडिटर लोधा पटेल वाधवा एंड कंपनी ने 10 अगस्त 2009 को साइनेज के टेंडर से जुड़े पेमेंट से पहले प्री-आडिट में जो फाइंडिंग दी है। प्री-आडिट फाइंडिंग ने भी आइकैच द्वारा 15 जून 2009 को दिए गए गए बिल को तिथिवार सही ठहराया है (देखें तस्वीर)। 


करार के शर्तों के प्रतिकूल हुआ भुगतान 

आइकैच और NGOC के बीच 20 दिसंबर 2008 को करार पर हस्ताक्षर किए गए। इस करार के आर्टिकल 4 के अनुसार आइकैच को कुल टेंडर वैल्यू के 30 प्रतिशत राशि का भुगतान मोबिलाइजेशन एडवांस के तौर पर करना था। जबकि 50 फीसदी राशि का भुगतान साइनेज का काम खत्म होने के पश्चात और शेष बचे 20 प्रतिशत राशि का भुगतान खेलों के सफलतापूर्वक आयोजन के बाद होना था। लेकिन 22 जनवरी 2009 को काम खत्म होने से पहले ही आइकैच को करार के शर्ताें के विपरित जाकर 1.5 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान कर दिया गया। इस भुगतान के लिए सक्षम प्राधिकार से किसी प्रकार की अनुमति भी नहीं ली गयी। प्री-आडिट के दौरान लोधा पटेल वाधवा एंड कंपनी ने इस विषय को NGOC के समक्ष रखा लेकिन पदाधिकारियों ने इसपर कोई कार्रवाई नहीं की। आइकैच के प्रति NGOC के पदाधिकारी टेंडर प्रक्रिया के ही समय से रिझे हुए थे। sportsjharkhand.com को जानकारी मिली है कि आइओए के तत्कालीन पदाधिकारी ने आइकैच के प्रतिनिधियों को NGOC के कर्ता-धर्ताओं से मिलवाया था और संभवतः यही कारण था कि आइकैच के प्रति NGOC के पदाधिकारियों का कुछ ज्यादा ही झुकाव था। 


क्यों पड़ी फर्जी बिल की जरूरत 

दरअसल आइकैच द्वारा जमा किए गए दस्तावेज बताते हैं कि 22 जनवरी 2009 तक आइकैच की ओर से मात्र 7,87,500 + 7,87,500 + 5,62,500 = 21,37,500 रुपये का काम ही किया गया था और इतने का इनवाॅइस कंपनी की ओर से विभाग में जमा किया गया था। लेकिन आइकैच की एमडी संगीता रानी गुम्मी ने 22 जनवरी को मेल कर 2,12,36,124 रुपये के दूसरे किश्त की मांग कर दी। इस मांग को अमली जामा पहनाने के लिए फर्जी इनवाॅइस की जरूरत थी क्योंकि अगर फर्जी इनवाॅइस नहीं दिया गया होता तो 22 जनवरी को 1.5 करोड़ रुपये का भुगतान ही संभव नहीं था। 


फर्जी इनवाॅइस में सामग्री वही, रेट नई

सभी इनवाॅइसों के अध्ययन से ये पता चलता है कि कमोबेश फर्जी इनवाॅइस और वास्तविक इनवाॅइस में सामग्रियों की सूची एक ही है लेकिन रेट में जमीन आसमान का अंतर है। इनवाॅइस नंबर दो और तीन में तो सामग्रियों की सूची हुबहु वही है लेकिन रेट अलग-अलग है।   


फर्जी इनवाॅइस पर प्रोजेक्ट मैनेजर वामसी कोलन के हस्ताक्षर 

sportsjharkhand.com ने जब दस्तावेजों का विश्लेषण किया तो ये बात खुलकर सामने आई कि फर्जी इनवाॅइस पर रांची स्थित आइकैच के कैंप कार्यालय में कार्यरत प्रोजेक्ट मैनेजर वामसी कोलन के हस्ताक्षर हैं। वामसी कोलन ने विभाग से कई बार पत्राचार किया था और पत्राचार पर किए गए हस्ताक्षर और फर्जी इनवाॅइस पर किए गए हस्ताक्षर से हुबहु मेल खाते हैं। 


इतनी जल्दबाजी में क्यों थे NGOC के पदाधिकारी

NGOC के पदाधिकारियों की मिलीभगत के बगैर ये संभव ही नहीं कि फर्जी इनवाॅइस के आधार पर 1.5 करोड़ जैसी बड़ी रकम का भुगतान हो जाए। आखिर NGOC के पदाधिकारी इतनी जल्दबाजी में क्यों थे ? नजरे इनायत कीजिए


तारीख: 22 जनवरी 2009

समय: सुबह के 8ः19ः32 बजे (8 बजकर 19.32 सेकेण्ड) 


ठीक इसी वक्त NGOC के तत्कालीन निदेशक पीसी मिश्रा के निजी और NGOC के आधिकारिक मेल क्रमशः pcmforest123@yahoo.co.inऔर directorng@34thnationalgamesjharkhand.in पर आइकैच की संस्थापक एमडी संगीता गुम्मी के इ-मेल आइडी sangeethagummi@icatchindia.com से एक मेल आता है, जिसका विषय है Signages (Tender No : NG/12) Request for Payment. आपको विश्वास हो या ना हो लेकिन इस मेल के आने के बाद NGOC के अधिकारी पेमेंट के लिए इस कदर रेस हो जाते हैं कि 22 जनवरी को ही NGOC के तत्कालीन कोषाध्यक्ष मधुकांत पाठक, निदेशक पीसी मिश्रा व सचिव आर एस वर्मा (अब स्वर्गीय) की सहमति मिल जाती है और चेक जारी हो जाता है। 24 को हैदराबाद से चली चेक पावती की रशीद 26 को कोषाध्यक्ष के यहां रिसिव भी हो जाती है।