टेंडर कमिटी ने अयोग्य आइकैच को योग्य बता कर डाली काम देने की अनुशंसा

2019-07-08

राष्ट्रीय खेल घोटाले की ऐसी सच्चाई, जो 9 वर्षों में एसीबी भी नहीं ढूंढ पाई - 3


रांची 

sportsjharkhand.com 

साइनेज का टेंडर गलत तरीके से दिए जाने से जुड़ी दो खबरें अभी तक आप पढ़ चुके हैं। 


1.आइकैच ने वर्क ऑर्डर से तीन दिन पहले ही जमा करा दी थी मुहर लगी ब्लैंक सिक्योरिटी डिपॉजिट

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2. कर्मठता ऐसी कि एक ही दिन में NGOC ने आईकैच को दिया वर्क ऑर्डर, किया करार और दे डाला 1.18 करोड़ का एडवांस

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अब तीसरे एपिसोड में हम पढ़ेंगे टेंडर कमिटी आइकैच पर इतनी मेहरबान क्यों थी कि तकनीकी शर्तों को पूरा नहीं करनेवाली कंपनी को काम देने की अनुशंसा कर दी। दरअसर लिखित दस्तावेज पारंपरिक ननद-सास सरीखी होती है, बगैर बहु (इस मामले में सच्चाई) की चुगली किए रह ही नहीं सकती। इस मामले में भी दस्तावेज टेंडर कमिटी के कुकर्मों की चुगली स्वयं कर रहे हैं और निगरानी के जांच अधिकारियों को श्वसुर-भसूर की तरह कुछ दिखाई-सुनाई नहीं दे रहा है। 

साइनेज के लिए जारी टेंडर में 8 तकनीकी शर्तें थी, टेंडर में सफल होने के लिए सभी में क्वालीफाइ होना आवश्यक था। इसमें से टेंडर कमिटी के सदस्यांे ने काॅलम 7 और काॅलम 8 में आइकैच की अयोग्यता के बावजूद उसे तकनीकी तौर पर योग्य माना। काॅलम 7 के तहत कंपनी को ये बताना था कि पिछले तीन वर्षों के दौरान पिछले तीन वित्तीय वर्ष में से किसी भी एक वर्ष में कंपनी का टर्नओवर 2 करोड़ रुपये होना चाहिए। आइकैच ने टर्नओवर से जुड़ी कोई जानकारी नहीं दी और इससे जुड़े दस्तावेजों की जगह अपना पासबुक दे दिया। टेंडर कमिटी ने दरियादिली दिखाते हुए सरकारी दस्तावेज पर इसे उकेरते हुए सही करार दिया दिया (देखें तस्वीर)। इसके अलावा काॅलम 8 में कंपनी को पिछले 5 वर्षों के दौरान इसी तरह के काम किए जाने संबंधी अनुभव की जानकारी देनी थी लेकिन इस काॅलम में टेंडर कमिटी आइकैच के नाम के सामने कुछ भी उकेर नहीं पायी (देखें तस्वीर)। क्योंकि कोई दस्तावेज सौंपे ही नहीं गए। टेंडर कमिटी के सदस्यों द्वारा हस्ताक्षरित दस्तावेज में ये साफ-साफ दर्ज है। राष्ट्रीय खेलों के लिए जारी टेंडर में ये शर्त थी कि जो कंपनी तकनीकी तौर पर क्वालीफाइ करेगी उसी कंपनी का वित्तीय बीड खोला जाएगा। लेकिन 9 में दो महत्वपूर्ण शर्तों को पूरा नहीं करनेवाली कंपनी को तकनीकी तौर पर योग्य करार दिया गया। ऐसा किसके इशारे पर किया गया ? पता हो कि इसी टेंडर कमिटी ने आधे घंटे विलंब से आने पर विश्व की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक को किसी अन्य विषय से जुड़े टेंडर पर तकनीकी तौर पर डिस्क्वालीफाई कर दिया था तो फिर इस मामले में इतनी बड़ी चूक जानबूझकर क्यों की गयी ? फिसलन की वजह गांधी ब्रांड मक्खन थी या कुछ और ? जांच का विषय है, लेकिन निगरानी के जांचकर्ताओं को सूझे तब ना ! 


वल्र्ड मिलिट्री गेम्स का फर्जी दस्तावेज दिया था आइकैच ने

sportsjharkhand.com को विश्वस्त सूत्रों से जानकारी मिली है कि आइकैच ने 14 से 21 अक्टूबर तक 2007 में हैदराबाद-सिकंदराबाद व अन्य शहरों में हुए वल्र्ड मिलिट्री गेम्स में साइनेज का काम करने का फर्जी सर्टिफिकेट जमा किया था। इसकी सच्चाई जब टेंडर कमिटी से बाहर के एक वरीय सदस्य को पता चल गयी तो टेंडर कमिटी के सदस्यों ने उस दस्तावेज को किनारे कर दिया गया और काॅलम को खाली छोड़ दिया। सच्चाई ये थी आइकैच के पास इस तरह के काम करने का कोई अनुभव था ही नहीं। इसके बावजूद आइकैच येन-केन प्रकारेण काम दिया गया। 


फाइल से गायब दिख रहे हैं तकनीकी बीड के दस्तावेज

सबसे आश्चर्यजनक बात ये है कि साइनेज की फाइल में टेंडर में भाग लेनेवाली तीनों कंपनियों के वित्तीय दस्तावेज तो मौजूद हैं लेकिन तकनीकी दस्तावेज गायब ! ऐसा किसने, क्यों और किसके इशारे पर किया ? ये तो जांच के बाद ही साफ हो पाएगा। वैसे राष्ट्रीय खेल घोटाले से जुड़े कई फाइलों से जुड़े दस्तावेजों के गायब होने की खबरें आई थी। 



आनेवाले दिनों में पढ़िए


कौन हैं संगीता रानी गुम्मी ? जिनके एक मेल पर मात्र 5 घंटे में NGOC कर देती थी नियमविरुद्ध करोड़ों का भुगतान


आइकैच की MD ने कंपनी प्रतिनिधि व गवाह दोनों की हैसियत से एक ही करार के दस्तावेज पर क्यों किए हस्ताक्षर


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