कर्मठता ऐसी कि एक ही दिन में NGOC ने आईकैच को दिया वर्क ऑर्डर, किया करार और दे डाला 1.18 करोड़ का एडवांस

2019-07-03

राष्ट्रीय खेल घोटाले की ऐसी सच्चाई, जो 9 वर्षों में एसीबी भी नहीं ढूंढ पाई - 2


रांची 

sportsjharkhand.com टीम


आईकैच को साईनेज़ का ठेका देने को लेकर राष्ट्रीय खेल आयोजन समिति (NGOC) के पदाधिकारियों के बीच की वैचारिक एका, कर्तव्यपरायणता, कर्मठता व समयनिष्ठा (Punctuality) देखने लायक थी। 19 दिसंबर को विभागीय मंत्री ने एकल निविदा को मंजूरी दी। फ़ाइल 19 को ही निदेशक के ऑफिस पहुंची। 20 को विभागीय सचिव की हामी के बाद निदेशक ने वर्क ऑर्डर दिया। वर्क ऑर्डर लेने के लिए आईकैच की तेज़ तर्रार मैनेजिंग डायरेक्टर संगीता रानी गुम्मी स्वयं मौजूद थीं। 20 दिसंबर को ही संगीता रानी गुम्मी ने 1.18 करोड़ का पोस्ट डेटेड चेक और इंडेमिनिटी बॉन्ड निदेशक महोदय के यहां जमा कराया। थोड़ी ही देर बाद उसी दिन मैनेजिंग डायरेक्टर संगीता रानी गुम्मी और NGOC के निदेशक पीसी मिश्रा ने 6 पन्नों के करार पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद निदेशक ने कोषाध्यक्ष को आईकैच के पक्ष में साईनेज़ टेंडर के एवज में मोबिलाइजेशन एडवांस के रूप में 1 करोड़ 18 लाख 20 हज़ार रुपये का चेक  जारी करने का आदेश दिया। आदेश पर तामिला करते हुए कोषाध्यक्ष ने 20 को ही चेक जारी कर दिया। आईकैच की मैनेजिंग डायरेक्टर संगीता रानी गुम्मी ने उसी दिन स्वयं चेक रिसीव किया।


हड़बड़ी ऐसी कि आधा अधूरा चेक ही रिसीव कर लिया संगीता रानी गुम्मी ने


साईनेज़ से जुड़ी फाइल संख्या NGOC 42/2008 के 80 नंबर पेज बताता है कि 1.18 करोड़ रुपये का चेक संगीता रानी गुम्मी ने रिसीव किया है। लेकिन खास बात ये है कि जो चेक रिसीव किया गया है उसमें सिर्फ और सिर्फ NGOC के कोषाध्यक्ष के हस्ताक्षर हैं। निदेशक व आयोजन सचिव 1 के हस्ताक्षर नहीं हैं (देखें तस्वीर)। मतलब साफ है कि जल्दबाज़ी में रिसिविंग ली गई। मोबिलाइजेशन एडवांस से जुड़ी फ़ाइल संख्या NGOC/T/92 का पृष्ठ संख्या 45 इसकी पोल खोलता हुआ दिख रहा है। जहां आयोजन सचिव, निदेशक व कोषाध्यक्ष के हस्ताक्षर तो हैं लेकिन रिसिविंग नहीं। जल्दबाज़ी में की गई गड़बड़ी को सुधारने के लिए 22 दिसंबर 2009 को आईकैच की ओर से 1.18 करोड़ रुपये मोबिलाइजेशन एडवांस के तौर पर लिए जाने की रिसिविंग दी गई। चेक एक लेकिन रिसिविंग दो ! 


ये कौन सा मक्खन था, जिसकी जद में फाइलें इतनी तेजी से फिसली !


राष्ट्रीय खेलों के दौरान साईनेज़ के टेंडर की फ़ाइल की फिसलन की बराबरी कोई और फ़ाइल शायद ही कर पाए। 20 दिसंबर 2008 को NGOC के पदाधिकारियों का दिल साईनेज़ की फाईल पर इस कदर फिसला कि एक ही दिन में चट मंगनी से पट ब्याह तक करा डाला। इस चट मंगनी पट ब्याह पर निगरानी के जांच अधिकारियों की नज़र 9 सालों में क्यों नहीं गई ? क्या जांच नहीं करने का कोई मौखिक आदेश था ? जिस व्यवस्था में 200-400 रुपये पेंशन पाने के लिए वृद्ध, विधवा व विकलांगों को कई दिन-सप्ताह का चक्कर लगाना पड़ता हो वहां एक ही दिन में 1.18 करोड़ रुपये निकल गए और जांच अधिकारियों की नज़र 9 साल तक वहां नहीं पहुंची। ये बात हज़म होने लायक नहीं है। 



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