ये दोस्ती दूध-पानी की तरह निश्छल है या लोमड़ी-बगुले की तरह कपटपूर्ण ! 

2019-06-13

sportsjharkhand.com टीम

रांची

ये बेहद खुशी की बात है कि वर्षों तक थानों-अदालतों में मामले दर्ज कर व विभिन्न अखबारों-TV-वेबसाइट पर एक-दूसरे के खिलाफ खबरें देकर जानी दुश्मनी निभाते रहे खेल प्रशासक अब वर्षों बाद गले मिल रहे हैं। पिछले 6 माह के अंदर ये दूसरी तस्वीर है, जो खेल पत्रकारों को मुंह चिढ़ाती हुई दिख रही है। इससे पहले राष्ट्रीय खेल घोटाले के मुद्दई और मुदालेह की भी अप्रत्याशित तस्वीर भी सबके सामने आई थी। अचानक कृष्ण-सुदामा की तरह की दोस्ती का कारण अगर खेल व खिलाड़ियों का विकास है तो ऐसी दोस्ती का खुले दिल से स्वागत होना चाहिये लेकिन दुश्मन से दोस्त बने लोगों को सार्वजनिक तौर पर ये बताना चाहिए कि उन मामलों का क्या होगा जो मामले थानों व अदालतों में विचाराधीन हैं ?

दोनों पक्ष थानों-अदालतों में चल रहे मुकदमें में अपने स्टैंड पर कायम रहेंगे या दोस्ती निभाएंगे ?

ये भी बताना चाहिए कि सालों बाद अचानक हृदयपरिवर्तन के पीछे के क्या कारक हैं ?

क्या आरोपी चोर अब ईमानदार हो गए ? या ईमानदार लोग भी चोर हो गए ? कुछ तो हुआ है ? किसी के इशारे पर हुआ है। 

दुश्मन अपने दुश्मन को बचाने के लिए दोस्ती के पत्र क्यों बांच रहा है ?

दाल पहले काली थी या अब हो गई है ? सवाल तो बनता है ?

एक खेल पत्रकार के तौर पर अचानक उभर आई इस मित्रता का दूसरा पक्ष ये भी है कि जानी दुश्मनी के पायजामे में नूरा कुश्ती के दौरान खेल पत्रकारों का लगभग 10 साल भी बेकार ही चला गया ! इस दौरान sportsjharkhand.com को इस बात की खुशी है कि हमने खबरों के चयन में खबर से दोस्ती पूरी ईमानदारी से निभाई है और आगे भी ये सिलसिला जारी रहेगा। आप दोस्ती का गंठजोड़ करते रहिए सिर्फ एक आग्रह है दोस्ती दूध व पानी की तरह निश्छल रखियेगा ना कि लोमड़ी व बगुला की तरह कपटपूर्ण।

सभी नए-नवेले मित्रों को मिलकर खेल पत्रकारों के खिलाफ अदालती कार्रवाई करनी चाहिए जिन्होंने 10 सालों तक इन मित्रों के बीच मंथरा का काम किया !