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सोशल साइट पर छलका शाहबाज नदीम का दर्द, कहा : सिर्फ प्रदर्शन नहीं... गाॅडफादर का होना जरूरी
2017-12-05  17:56:20

sportsjharkhand.com टीम

रांची

रणजी ट्राॅफी के लगातार दो सत्रों में 50 से ज्यादा विकेट लेनेवाले बांए हाथ के आॅर्थोडाॅक्स स्पिनर शाहबाज नदीम का दर्द सोमवार की रात सोशल साइट पर छलक पड़ा। अपने फेसबुक पेज पर शाहबाज नदीम ने अंग्रेजी में लिखा है जिसका हिंदी अनुवाद/भावार्थ है कि...

मुझे लगता है कि आज के दौर में किसी भी प्रोफेशन में कुछ पाने के लिए सिर्फ आपका प्रदर्शन नहीं बल्कि एक गाॅडफादर की भी जरूरत है। मैं सोचता था कि खेल इस लिस्ट में शामिल नहीं है लेकिन मैं गलत था। केवल प्रदर्शन आपकी मदद नहीं करेगा दोस्तों... अब गाॅडफादर की जरूरत है... हा.हा.हा.

(अंग्रेजी में लिखी पूरी बात आप इस खबर के साथ दी गयी तस्वीर में पढ़ सकते हैं) शाहबाज नदीम का यह पोस्ट ठीक उसी दिन आया जब श्रीलंका के खिलाफ वनडे और टी-20 व दक्षिण अफ्रीका दौरे के लिए भारतीय क्रिकेट टीम की घोषणा की गयी। दोनों ही टीम में अपना नाम नहीं पाकर निराशा के भाव के साथ शाहबाज नदीम ने अपने दिल की बात फेसबुक के पन्नों पर उकेर दी। पोस्ट सामने आते ही कई लोगों/दोस्तों ने नदीम को समझाते हुए अपने पोस्ट डाले, कुछ ने सांत्वना दी और कुछ ने खबर बनाने की बात पूछ डाली।  

आखिर क्यों छलका दर्द ?

जब आप अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर पर दे रहे हों और चयनकर्ता लगातार दो साल से आपको नजरअंदाज कर रहे हों तो यह दर्द छलका जायज प्रतीत होता है। 2015-16 रणजी सत्र में 51 और 2016-17 सत्र में 56 विकेट (दोनों ही सत्र मंे सबसे ज्यादा विकेट लेनेवाले गेंदबाज) लेनेवाले गेंदबाज को अगर टी-20, वनडे या टेस्ट किसी भी टीम में जगह दो साल के अंदर ना मिले तो दर्द तो छलकना ही है। चयनकर्ताओं ने शाहबाज को भारत ए टीम का सदस्य बनाकर अपनी जिम्मेवारी की इतीश्री कर ली और एक क्रिकेटर अंदर तक टूटता गया। 

गुमला एजीएम ने उठा था शाहबाज नदीम का मसला

इसी वर्ष गुमला एजीएम के दौरान जमशेदपुर के कुछ बुजुर्ग सदस्यों ने शाहबाज नदीम के साथ हो रही नाइंसाफी का मुद्दा जोर-शोर से उठाया था, और अमिताभ चैधरी से इस विषय पर ध्यान देने का आग्रह करते हुआ कहा था कि प्रदर्शन के साथ आपकी मौजूदगी में राज्य के किसी खिलाड़ी के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। पता हो कि अमिताभ चैधरी अभी बीसीसीआइ के एक्टिंग सेके्रटरी हैं।

हमें तो अपनो ने लूटा, गैरों में कहां दम था !

शाहबाज नदीम का दुःख इसलिए ज्यादा है कि झारखंड में लगभग डेढ़ दशक तक क्रिकेट प्रशासक रहे अमिताभ चैधरी अभी बीसीसीआइ के एक्टिंग सेक्रेटरी हैं और इसी दौरान लगातार उनके साथ नाइंसाफी होती जा रही है। ये बात सही है कि अभी भारतीय टीम मंे रवीन्द्र जडेजा जैसा बेहतर लेफ्ट आर्म स्पिनर आॅलराउंडर के रूप में मौजूद है लेकिन उन्हें रेस्ट देने की स्थिति में भी शाहबाज नदीम को मौका नहीं मिलना, ज्यादा दुःखदायक है।   

मोहिंदर अमरनाथ ने ऐसे ही नहीं कहा था जोकरों का समूह

अस्सी के दशक में भारतीय क्रिकेट टीम के रेगुलर सदस्य मोहिंदर अमरनाथ ने चयनकर्ताओं के इसी तरह के व्यवहार को देखते हुए उन्हें जोकरों का समूह की संज्ञा दे डाली थी। इसके बाद मोहिंदर को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था, लेकिन मोहिंदर अमरनाथ अपने स्टैंड पर कायम रहे थे। शाहबाज नदीम के मामले में भी मोहिंदर अमरनाथ के तीन दशक पहले दिए गए बयान हूबहू फिट बैठ रहा है ! है ना ?