Sports Jharkhand
धौनी के प्रैक्टिस विकेट पर चला CCL का बुलडोज़र
2016-12-26  22:01:17

सुशील

sportsjharkhand.com

रांची

जी हां ! ये सच है ! जिस महेंद्र सिंह धौनी के कारण रांचीवासी खुद को गौरवान्वित महसूस करते हैं, उस धौनी से जुड़े चार साल की यादों को CCL के बुलडोज़रों ने कुछ ही घंटों में ज़मींदोज़ कर दिया। CCL मुख्यालय दरभंगा हाउस के दक्षिण भाग में मौजूद मैदान पर अब कभी कोई भी खिलाड़ी नज़र नहीं आएगा। धौनी ने टीम इंडिया में जगह बनाने के सपनों को पूरा करने के लिए जिस मैदान में 1997 से 2001 तक पसीना बहाया, वो मैदान अब कन्वेंशनल हॉल सेंटर के नाम पर इतिहास के पन्नो में सिमटने जा है। पता हो कि वर्ष 1997 से 2001 तक धौनी ने CCL की ओर से क्रिकेट खेला और इसी दौरान रणजी ट्रॉफी के दर्ज़नों मैच के अलावा दिलीप ट्रॉफी का पदार्पण मैच भी CCL में रहते हुए ही खेला। जिस टर्फ विकेट पर धौनी प्रैक्टिस कर क्रिकेट के सबसे बड़े स्टार में से एक बने, आगे बढ़े आज उसका नामोनिशान तक मिट चुका है। हाँ ये ज़रूर है कि दो सीमेंटेड विकेट खुद के ज़मींदोज़ होने का  का इंतज़ार कर रहे हैं (देखें तस्वीर)। कभी यहाँ पर मौजूद तीन टर्फ विकेटों पर धौनी के साथ, अंशुमान राज, शब्बीर हुसैन, राजीव राजा, अरुण विद्यार्थी, देवेश चन्द्रा, आदिल हुसैन, सूरज नारायण लाल, राजीव रंजन, अनंत प्रकाश, सुब्रोतो घोष जैसे खिलाड़ी प्रैक्टिस किया करते थे, लेकिन अब कोई और धौनी, आदिल, अरुण, राजीव, देवेश, सूरज यहाँ से नहीं निकलेगा !

क्रिकेट ही नहीं यहाँ वॉलीबॉल और बैडमिंटन के कोर्ट के अलावा फुटबॉल का भी एक छोटा सा ग्राउंड था, जहाँ दर्ज़नों खिलाड़ी रोजाना प्रैक्टिस के लिए आते थे। अब सभी खिलाड़ियों को नया ठौर ढूँढना होगा, क्योंकि भविष्य के ओलिंपियन बनाने का दावा करने वाले CCL के अधिकारियों ने खिलाड़ियों का वर्तमान अंधकारमय कर दिया है।

CCL का दोहरा चरित्र उजाग

CCL एक ओर करोड़ों रूपये खर्च कर झारखण्ड सरकार के साथ खेल अकादमी चला रहा है दूसरी ओर कप्तान धौनी से जुड़े मैदान के अस्तित्व को ही समाप्त कर देना। CCL के आलाधिकारियों के मानसिक दिवालियेपन का जीता-जागता सबूत है। हर मंच से धौनी का नाम CCL से जोड़ने और भंजाने के आदि हो चुके अधिकारियों ने कन्वेंशनल सेंटर के नाम पर धौनी से जुड़ी यादों को सदा-सर्वदा के लिए मिटाने का जो कुकृत्य किया है, उसकी जितनी निंदा की जाए वो काम है। 

100 करोड़ में बनेगा कन्वेंशनल हॉल

CCL की सूत्रों की मानें तो खेल मैदान और उससे सटे अन्य खाली जगहों पर 100 करोड़ की लागत से कन्वेंशनल हॉल बनाया जा रहा है। पहले हॉल के साथ एक ऑडिटोरियम बनाने की भी चर्चा थी, लेकिन तत्काल उसे टाल दिया गया है। कोयला सचिव सुशील कुमार ने 13 दिसम्बर 2016 को इस योजना का शिलान्यास किया, जब वे चार दिवसीय दौरे पर झारखण्ड आये हुए थे। इसके बाद से बुलडोजरों और पोकलेन ने यादगार इतिहास और सुनहरे भविष्य के सपनो को तोड़ना-कोड़ना शुरू कर दिया। CCL में पहले से ही एक कन्वेंशनल हॉल विचार मंच के नाम से है, फिर दुसरे हॉल बनाने की योजना के पीछे की सच्चाई क्या है ? ये तो अधिकारी ही बता सकते हैं।

पूर्व खिलाड़ियों ने साधी चुप्पी

प्रबंधन के इस निर्णय से CCL में कार्यरत पूर्व खिलाड़ियों को काठ मार गया है। sportsjharkhand.com की टीम ने एक दर्ज़न खिलाडियों का मन टटोला। सभी नाराज़ हैं लेकिन कोई भी प्रबंधन के खिलाफ बोलने को तैयार नहीं। मैदान के ख़त्म होने से खिलाड़ियों की नाराजगी छुपाने से भी नहीं छिप रही है।

16 अगस्त को सौदर्यीकरण का हुआ था फैसला

बीते 16 अगस्त को संयुक्त सलाहकार संचालन समिति की बैठक में CCL मुख्यालय स्थित खेल मैदान का सौंदर्यीकरण कर उसके चारों ओर कम ऊंचाई वाली चारदिवारी का निर्माण कराये जाने का निर्णय लिया गया था। और पत्रांक पी डी/आई आर/16/704(H)के जरिये भी संयुक्त सलाहकार संचालन समिति के सदस्यों और आलाधिकारियों को इसकी सूचना भी दी गयी थी। लेकिन चार माह के अंदर ही प्रबंधन ने अपने फैसले पर यू टर्न लेते हुए मैदान का अस्तित्व ख़त्म करने का निर्णय ले लिया। कायाकल्प सुनहरे कल की ओर नामक CCL की पत्रिका के 15वें पेज पर क्रमांक नंबर 66 पर उक्त निर्णय का जिक्र किया गया है।