Sports Jharkhand
कांस्य पदक जीतने पर भी झारखंड टीम को नहीं दिया गया मेडल (दिवाकर/प्रभात खबर)
2016-12-07  22:34:22

दिवाकर सिंह (प्रभात खबर)
 झारखंड की अंडर-14 बालक हॉकी टीम स्कूल नेशनल खेलने रोहतक गयी थी.  वहां तीसरे स्थान के लिए मैच खेलने के पहले और बाद में चंडीगढ़ टीम के लोगों ने धमकी दी और कहा कि लिख कर दो कि हम तीसरे नंबर के लायक नहीं है नहीं तो झारखंड टीम को तीन साल का बैन लगवा देंगे. झारखंड की टीम कांस्य पदक जीतकर लौटी है लेकिन उनके हाथ में न तो मेडल है और न ही प्रमाणपत्र. चंडीगढ़ टीम के लिखित शिकायत के बाद उन्हें 30 दिसंबर तक अपने जन्म प्रमाणपत्र जमा करने को कहा गया है तभी उनको मेडल दिया जाएगा. 

कांस्य पदक जीतने पर झारखंड टीम को मिली थी धमकी 
रोहतक में स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से अंडर-14 व अंडर-17 राष्ट्रीय हॉकी प्रतियोगिता का आयोजन 26 नवंबर से एक दिसंबर तक किया गया था. लेकिन मेजबान राज्य की ओर से हर दिन खिलाड़ियों को परेशान किया गया. वहीं हद तो तब हो गयी जब झारखंड अंडर-14 बालक की टीम कांस्य पदक के लिए मैच खेलना शुरू किया. मैच के पहले टीम को चंडीगढ़ की टीम ने कहा कि हार मान लो. इसके बाद झारखंड के खिलाड़ी बीच में मैच छोड़कर जाने लगे. इसके बाद एसजीएफआइ के सेक्रेटरी केएस मूर्ति ने बीच-बचाव किया, जिसके कारण मैच फिर से एक घंटे बाद शुरू हुआ. जिसमें झारखंड ने चंडीगढ़ को हराया. कांस्य पदक जीतने के बाद भी चंडीगढ़ टीम का एक मेंबर झारखंड टीम के कमरे में आया और धमकी दी कि तुम लोग लिखकर दो कि हम तीसरे नंबर पर रहने के लायक नहीं है, नहीं तो तुम्हारी टीम का तीन साल का बैन लगवा देंगे. ओवरएज खिलाड़ी होने की दी लिखित शिकायत, नहीं मिला मेडल धमकी देने के बाद भी चंडीगढ़ टीम के लोग शांत नहीं हुए और एसजीएफआइ के अधिकारियों को लिखित शिकायत दी. जिसमें कहा गया कि झारखंड के कई खिलाड़ी ओवरएज है और इसकी जांच की जाए. इसके बाद झारखंड अंडर-14 बालक टीम के खिलाड़ियों ने अपने स्कूल का प्रमाणपत्र दिखाया जिसे नहीं माना गया और 30 दिसंबर तक जन्म प्रमाणपत्र जमा करने को कहा गया. प्रमाणपत्र देने के बाद भी झारखंड टीम के खिलाड़ियों को मेडल दिया जाएगा. वहीं ऐसा पहली बार हुआ है कि झारखंड की टीम कांस्य पदक जीतने के बाद भी बिना मेडल के लौटी है. 

आयोजकों ने किया सौतेला व्यवहार 
झारखंड की अंडर-14 व 17 बालक व बालिका टीम के साथ पहले ही दिन से आयोजकों ने सौतेला व्यवहार किया. खाने के समय खिलाड़ियों को मेजबान टीम कहती थी कि पहले हम खाएंगे उसके बाद तुम लोग खाना. यही नहीं अंडर-17 महिला हॉकी टीम को दो एस्टोटर्फ मैदान होने पर भी मिट्टी के मैदान में खेलने पर मजबूर किया गया. 


हॉकी टीम की का कहना है कि चंडीगढ़ की टीम कभी नहीं चाहती थी कि वो हारे. इसके लिए मैच के शुरू होने के साथ ही दबाव बनाया गया. इसके बाद भी हमारी टीम पर दबाव बनाया गया. 

प्रतिमा बारवा, मेनेजर

केएस मूर्ति, सचिव, एसजीएफआइ