Sports Jharkhand
खिलाड़ियों को ढाल बनाकर साई सैग सेंटर के कर्ता-धर्ताओं ने सरकार को लगाया लाखों का चूना
2016-12-03  11:53:17

राजभवन का दवाब बनाकर अपनी जिम्मेवारी खेल विभाग के मत्थे डाली

sportsjharkhand.com टीम 

रांची

झारखंड में खेल एवं खिलाड़ियों के सुनहरे भविष्य का सपना दिखाकर सरकारी राशि के लूट का खेल बदस्तुर जारी है। खेल में चल रहे खेला का ताजा मामला मोरहाबादी स्थित बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम से जुड़ा है, जहां खिलाड़ियों को ढाल बनाकर स्पोर्ट्स ऑथिरिटी ऑफ इंडिया के स्पेशल एरिया गेम सेंटर (साई सैग) के अधिकारियों ने सरकार को लगभग तीस लाख रुपए (आंकड़ा ज्यादा भी हो सकता है) का चुना लगा दिया। साई के खिलाड़ियों ने राजभवन को पत्र लिखकर स्टेडियम की दुर्दशा सुधारने की गुहार लगायी। खास बात यह है कि खिलाड़ियों ने ना तो साई सैग रांची, कोलकाता-दिल्ली में बैठे अधिकारियों को ना ही राज्य सरकार के खेल विभाग को स्टेडियम की दुर्दशा का पत्र लिखा। पत्र सीधे राजभवन को लिखा। इस पूरे प्रकरण में साई के आलाधिकारियों ने बिरसा मुंडा स्टेडियम में प्रशिक्षण केंद्र चलाने के लिए 17 अगस्त 2007 को सरकार के साथ किए गए 30 साल के करार का खुल्लम खुल्ला उल्लंघन करते हुए चपत लगा दी। करार के क्लॉज 6 (v) और 6 (xiv)  (देखें तस्वीर) में साफ है कि मैदान और स्टेडियम के मेंटेनेंश/रिपेयरिंग की पूरी जिम्मेवारी साई की थी/ है। इसके बावजूद साई के कर्ता-धर्ताओं ने खिलाड़ियों से मैदान और स्टेडियम के खराब हालात से संबंधित एक पत्र राजभवन को भिजवाया। इसके बाद राजभवन से यह पत्र खेल विभाग में आया और आदर सम्मान दिखाते हुए खेल विभाग ने नियमों के विरुद्ध जाकर लगभग 30 लाख रुपए आवंटित कर दिए। काम शुरू हो गया है, खिलाड़ियों को सुविधाएं दिलाने के नाम पर साई सैग के अधिकारियों के कमरे चमकाने का काम जारी है। 

चमचे को खुश करने के लिए सरकार ने सरकार का कराया नुकसान

राजभवन में पदस्थापित एक बड़े आइएएस अधिकारी अपने कुनबे के साथ पिछले दो दशक से बिरसा मुंडा स्टेडियम के रेगुलर मार्निंग वॉकर रहे हैं। हाल के दिनों में उनकी सेवा में दशकों से लगे साई के एक तीमारदार अचानक संस्था के प्रभारी बन गये। तीमारदार ने चाय-पानी पिलाते वक्त चैंबर/स्टेडियम की दुर्दशा बतायी। सरकार ने अचूक बाण चलाने का निर्देश अपने खास चमचे को दिया, निर्देशानुसार कागजी कार्रवाई करते/कराते हुए सरकार ने सरकार को लाखों रुपए की चपत लगा दी। पता हो कि ये आलाधिकारी दो दशक से भी ज्यादा समय से स्टेडियम में मॉर्निंग वॉक करने के लिए आते रहे हैं लेकिन स्टेडियम और मैदान की दुर्दशा का ख्याल उन्हें तभी  क्यों आया जब उनके तीमारदार के हाथ बटेर लगा ? आप खुद समझदार हैं ! 

कर्मचारियों ने अंधेरे में रखा आलाधिकारियों को

खेल विभाग में वर्षों से पदस्थापित कर्मचारियों/अधिकारियों ने विभाग के आलाधिकारियों को इस पूरे मसले पर अंधेरे में रखा। उन्होंने आलाधिकारियों का ध्यान एक बार भी 2007 में किए गए करार की ओर ध्यान नहीं दिलाया। विभाग में निदेशक एक साल से और सचिव कुछ माह पहले ही आए हैं, ऐसे में संभव है कि उन्हें करार की जानकारी ही ना हो। यह जिम्मा तो वर्षों से पदस्थापित उन कर्मचारियों का था, जिन्हें सच्चाई पता चली। सू़त्रों से पता चला है कि रिपेयरिंग कराने की फाइल जब मूव कर रही थी तो संविदा पर कार्यरत कुछ अति कनीय कर्मचारियों ने इस ओर फाइल डील करने वाले कर्मचारी का ध्यान बड़ी मजबूती से दिलाया था, लेकिन उन्हें चुप रहने का फरमान सुना दिया गया।

साई सैग ने प्रारंभिक बजट भी सौंपा !

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार साई सैग के अधिकारियों ने स्टेडियम के रिपेयरिंग के लिए बनाया गया एक प्रारंभिक बजट भी दिया था। इससे साफ है कि साई के अधिकारियों ने रिपेयरिंग का काम कराने का मन पहले से बनाया था। मौका मिलते ही अपने हिस्से का काम सरकार के मत्थे मढ़ दिया।