Sports Jharkhand
...If I cannot get my travel expences, you can imagine what will happen in the Games and who will listen to whom...
2019-03-01  18:04:53

sportsjharkhand.com टीम

रांची



हाल ही में राष्ट्रीय खेल घोटाले के नामजद आरोपी आरके आनंद के खिलाफ निगरानी ने चार्जशीट करने की अनुमति प्रशासी विभाग से मांगी है। ऐसी नौबत क्यों आई कि देश के सर्वश्रेष्ठ वकीलों में से एक आरके आनंद स्वयं निगरानी की जाल में फंसते हुए दिख रहे हैं। दरअसल पद की गर्मी सभी को बर्दाश्त नहीं होती और संभवतः आरके आनंद के संदर्भ में भी यही हुआ है। ये बात राष्ट्रीय खेल घोटाले के संदर्भ में उनके द्वारा 3 जुन 2008 को मधुकोड़ा को लिखे गए पहले पत्र से लेकर राज्यपाल एमओएच फारुख को 19 अगस्त 2010 तक लिखे गए दर्ज़नों पत्रों की भाषा से साफ जाहिर हो जाता है। राष्ट्रपति शाषण के दौरान सितंबर 2009 के आखिरी हफ्ते में तत्कालीन निदेशक पीसी मिश्रा को हटाए जाने से आह्लादित आरके आनंद ने अक्टूबर 2009 में पहले हफ्ते में ओपनिंग-क्लोजिंग सेरोमनी का टेंडर निपटारा कराने के बाद मामला गर्माता देख 9 अक्टूबर 2009 को तत्कालीन मुख्य सचिव शिव बसंत को पत्र लिखा (देखें तस्वीर)। लेटर हेड पर साफ-साफ दर्ज है कि आरके आनंद अपने रुतबे मतलब झारखंड के कैबिनेट मंत्री के दर्जा को दस्तावेज पर चस्पा किये हुए हैं। इसी रुतबे के साथ पत्र के पहले दो पैरा में भाषायी मस्का लगाते हुए शिव बसंत जी की तारीफों के पुल बांधे गए लेकिन दूसरे पैरा के दूसरे हाफ से ही आरके आनंद मुद्दे पर आ जाते हैं और लिखते हैं... 


“…I have no secretariat staff. Our bills for Hotels, travel, agreements are not being signed by the Govt. Officials. How do you expect various NGOC members to attend the meetings if their travel and stay is not being paid. I have totally left my profession and devoting my precious time for the Games in the interest of Jharkhand.

If I cannot get my travel expences, you can imagine what will happen in the Games and who will listen to whom…..”


इन शब्दों के मायने समझने में कोई दिक्कत नहीं आ रही होगी लेकिन जब केंद्र में सरकार अपनी हो और राज्य में राष्ट्रपति शासन हो तब अपने और अपने साथियों के बिल सरकारी अधिकारी द्वारा नहीं निपटाए जाने की झल्लाहट में भाषाई मर्यादा तो तार-तार होनी ही है। हम कुछ और फैक्ट आपके सामने रखते हैं। 


पहली बात : जिस वक्त का पत्र है उस वक़्त केंद्र में UPA 2 की सरकार थी और आरके आनंद कांग्रेस के बड़े नेता। 


दूसरी बात : होटल, आने-जाने व अन्य खर्चों का बिल पेमेंट नहीं होने से आरके आनंद इतने  नाराज क्यों दिख रहे हैं और मुख्य सचिव को लगभग धमकाते हुए लिखते हैं कि ...अगर मेरे आने-जाने का खर्चा नहीं मिला तो आप सोच सकते हैं कि खेल का क्या होगा और कौन किसकी बात सुनेगा...  दरअसल आरके आनंद को कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त था और उन्हें सरकारी गेस्ट हाउस में आवासन व भोजन की व्यवस्था कैबिनेट मंत्री के तर्ज पर मिलनी थी लेकिन आनंद गेस्ट हाउस छोड़ होटल में रूकते थे।बिल का पेमेंट एनजीओसी के अकाउंट से होता था। जो काम सरकारी गेस्ट हाउस में लगभग फ्री में हो जाता उसके लिए लाखों रुपये का भुगतान रोकने से आनंद नाराज दिख रहे थे। 


तीसरी बात : सरकार के दस्तावेज बताते हैं कि आरके आनंद दिसंबर 2017 में एनजीओसी के कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए। जुन 2006 में हस्ताक्षरित होस्ट सिटी कांट्रैक्ट में ये पद उनके (झारखंड ओलंपिक संघ के अध्यक्ष की हैसियत से) लिए आरक्षित था। फिर इतने दिनों  बाद आरके आनंद को कैसे याद आया कि कोई स्टाफ नहीं है और काम में परेशानी आ रही है। 2008 में कार्यकारिणी समिति की बैठक में आरके आनंद की मौजूदगी में एनजीओसी के लिए पदों की स्वीकृति दी गयी थी तब उनके आंख क्यों नहीं खुले थे ?


sportsjharkhand.com को जानकारी मिली है कि इसी पत्र और इसके मज़मून की तह में जाकर जब निगरानी के अधिकारियों ने जांच शुरू कि तो मामला चार्जर्शीट तक जा पहुंचा है। आनेवाले दिनों में हम आरके आनंद द्वारा लिखे गए कुछ और पत्रों का पोस्टमार्टम करेंगे और छुपी हुई सच्चाई आपके सामने लाएंगे।




नोट : sportsjharkhand.com का मकसद किसी भी प्रकार से निगरानी में चल रहे वाद को प्रभावित करने का नहीं है। हम सिर्फ दस्तावेजों में दफन उन सच्चाईयों को जनता के समक्ष रखना चाहते हैं जो अब तक सामने नहीं आई हैं।