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राष्ट्रीय खेल घोटाला : आरके आनंद व निविदा समिति के पांच अन्य सदस्यों के खिलाफ निगरानी को मिले पुख्ता सबूत, चार्जशीट व अभियोजन चलाने के लिए मांगी अनुमति
2019-02-27  02:31:47

sportsjharkhand.com EXCLUSIVE

रांची


सुशील


पिछले आठ साल से भी ज्यादा वक्त से चल रही जांच के बाद आखिरकार निगरानी ने झारखंड ओलंपिक संघ के अध्यक्ष आरके आनंद के खिलाफ पर्याप्त सबूत जुटाने का दावा करते हुए आनंद के खिलाफ चार्जशीट दायर करने व अभियोजन चलाने के लिए सक्षम प्राधिकार से अनुमति मांगी है। घपले-घोटाले के वक्त आरके आनंद राष्ट्रीय खेल आयोजन समिति (एनजीओसी) के कार्यकारी अध्यक्ष थे और उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त था। इस लिहाज से वे लोकसेवक की श्रेणी में आते हैं इसलिए निगरानी ने पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग को पत्र लिखकर राष्ट्रीय खेल आयोजन समिति के कार्यकारी अध्यक्ष आरके आनंद के खिलाफ चार्जशीट दायर करने व अभियोजन चलाने की अनुमति मांगी है। 34वें राष्ट्रीय खेल के दौरान प्रशासनिक व वित्तीय घपलों-घोटालों की बात सामने आने के बाद बीएन सिंह ने आरके आनंद समेत तीन अन्य को नामजद अभियुक्त बनाते हुए निगरानी में मामला दर्ज कराया था। तीन अन्य अभियुक्तों एनजीओसी के महासचिव एसएम हाशमी, कोषाध्यक्ष मधुकांत पाठक और तत्कालीन निदेशक पीसी मिश्रा के खिलाफ निगरानी ने चार्जशीट पहले ही दाखिल कर दी है। 



निविदा समिति के पांच अन्य सदस्य बनाए गए अप्राथमिकी अभियुक्त, चार्जशीट की तैयारी


निगरानी ने निविदा समिति के पांच अन्य सदस्यों तत्कालीन वित विभाग के प्रतिनिधि सुविमल मुखोपाध्याय, उद्योग विभाग के प्रतिनिधि प्रेम कुमार चौधरी, मंत्रिमंडल निगरानी विभाग के प्रतिनिधि सुखदेव सुबोध गांधी और साई सैग सेंटर के तत्कालीन प्रशासक एचएल दास को अप्राथमिकी अभियुक्त बनाते हुए सभी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने व अभियोजन चलाने के लिए सक्षम प्राधिकार से अनुमति मांगी है। निगरानी को इन सभी के खिलाफ भी वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितता से जुड़े पुख्ता सबूत मिले हैं। 



क्या है पूरा मामला


झारखंड में 34वें राष्ट्रीय खेलों के आयोजन से पहले, आयोजन के दौरान व आयोजन के बाद विभिन्न तैयारियों, समारोहों एवं वस्तुओं के क्रय के क्रम में वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं को अंजाम देते हुए बड़े पैमाने पर घपले-घोटाले को अंजाम दिया गया था। महालेखाकार की रिपोर्ट में भी उपरोक्त सभी लोगों की सहभागिता से लगभग 28 करोड़ रुपये के घपले-घोटाले को अंजाम दिया गया था। इसको लेकर बीएन सिंह ने वर्ष 2010 में निगरानी में मामला दर्ज कराया था। 



तत्कालीन खेल मंत्री बंधु तिर्की का बचना अब लगभग नामुमकिन !


इस पूरे प्रकरण में तत्कालीन खेल मंत्री बंधु तिर्की की भी परेशानी बढ़ने के आसार नजर आ रहे हैं। पुणे के एक व्यक्ति ने लगभग दो माह पहले मुख्यमंत्री, खेल मंत्री व निगरानी को पत्र लिखकर बंधु तिर्की के खिलाफ पुख्ता सबूत होने के बावजूद कार्रवाई ना होने पर कड़ी आपत्ती दर्ज कराई थी। इसके बाद निगरानी के अधिकारियों ने जेल में बंद बंधु तिर्की से पूछताछ की थी। जेल से बाहर आने के बाद भी पूछताछ का सिलसिला जारी है। एनजीओसी के निदेशक की हैसियत से पीसी मिश्रा ने प्रत्येक फाइल पर बंधु तिर्की की सहमति ली थी। जब प्रशासनिक व वित्तीय अनियमितता के आरोप में पीसी मिश्रा पर चार्जशीट दाखिल हो गई है तो बंधु का बचना लगभग नामुमकिन सा नजर आ रहा है।



3 अप्रैल तक जांच पूरा करने की डेडलाइन 


3 अक्टूबर 2018 को निगरानी के तत्कालीन एडीजी मुरारी लाल मिणा ने झारखंड हाई कोर्ट में शशरीर उपस्थित होकर राष्ट्रीय खेल घोटाले की जांच छह माह में पूरा करने का भरोसा दिलाया था।  इसके बाद से ही जांच में तेजी आई और अब चौथे नामजद अभियुक्त रामकुमार आनंद व पांच अप्राथमिकी अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने और अभियोजन चलाए जाने की तैयारी शुरू कर दी गयी है। छह माह की डेडलाइन 3 अप्रैल 2019 को पूरी हो रही है।