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राष्ट्रीय खेल घोटाला : \'मुद्दई\' व \'मुद्दालेह\' दोनों से पैसा वसूलेगी सरकार, दी आखिरी मोहलत
2019-02-10  01:01:16

sportsjharkhand.com टीम

रांची


राष्ट्रीय खेल घोटाले से जुड़ी नई परतें लगातार खुलती जा रही है। बदले हुए हालात में परिस्थितियां ऐसी बनती हुई दिख रही हैं कि इस घोटाले के मुद्दई (शिकायतकर्ता) व मुद्दालेह (आरोपी) दोनों अब खेल निदेशालय के रडार पर आ गए हैं। संभव है कि गलत जानकारी देकर नियम से परे जाकर अत्यधिक सरकारी राशि लिए जाने पर राष्ट्रीय खेल से जुड़े लगभग एक दर्जन प्रशिक्षकों को मनी सूट का सामना करना पड़े। निगरानी में दर्ज मामले के मुद्दई भोलानाथ सिंह ने 5.50 लाख रुपये और मुद्दालेह मधुकांत पाठक ने 5.00 लाख रुपये ज्यादा का भुगतान सरकार के खजाने से ले लिया। इन दोनों के अलावा आधे दर्जन से ज्यादा अन्य प्रशिक्षकों ने भी नियम विरुद्ध ज्यादा पैसे ले लिए थे। इसी को लेकर लगभग एक सप्ताह पहले निदेशालय की ओर से पत्र लिखकर सभी आरोपी प्रशिक्षकों को पैसा वापस करने का आखिरी मौका दिया गया है। पता हो कि पहले भी इन प्रशिक्षकों को नोटिस जारी कर नियमविरुद्ध ली गई राशि वापस करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन प्रशिक्षकों ने अब तक कोई राशि वापस नहीं कि है। पता हो कि इसी राष्ट्रीय खेल घोटाले से एक अन्य मामले में हाल ही में निगरानी ने पूछताछ के लिए पहली बार पूर्व खेल मंत्री बंधू तिर्की को भी तलब किया था। 8 साल से ज्यादा वक्त से जांच हो रहे इस मामले में 8 साल बाद तत्कालीन मंत्री से पूछताछ और अब ज्यादा भुगतान लेने के मामले में संभावित कार्रवाई ये बताने के लिए काफी है कि राष्ट्रीय खेल रूपी दाल में कुछ काला नहीं था, बल्कि पूरी दाल ही काली थी !



क्या कहता है सरकार का संकल्प

26 फरवरी 2011 को राष्ट्रीय खेल के समापन समारोह में तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा की घोषणा के आलोक में 25 जुलाई 2011 को खिलाड़ियों व प्रशिक्षकों को पुरस्कार देने के लिए विभाग ने संकल्प संख्या 2/खेल-कला-02/2009/416 जारी किया था। इसके अनुसार  प्रशिक्षकों के लिए स्वर्ण, रजत व कांस्य पदक के लिए क्रमशः 2 लाख, 1 लाख व 50 हज़ार रुपये से सम्मानित करने की व्यवस्था की गई थी। उपर्युक्त राशि एकल रूप से मान्य होगी तथा पदकों के गुणक नहीं होगी लेकिन लगभग इस नियम के विरुद्ध जाकर लगभग एक दर्जन प्रशिक्षकों ने पदकों के गुणक राशि सरकार से ले ली।



कानूनी कार्रवाई का मन बना चुका है निदेशालय

खेल निदेशालय ने कानूनी कार्रवाई करने का मन बना लिया है। विधि विशेषज्ञों से राय के पश्चात निदेशालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि सभी आरोपी प्रशिक्षकों के खिलाफ मनी सूट फाइल कर पैसे की वसूली की जाए। विभाग के निदेशक अनिल कुमार सिंह ने sportsjharkhand.com से बातचीत में बताया कि हमारे पास अब कोई विकल्प ही नहीं बचा है। मनी सूट ही एकमात्र विकल्प बचा है।



ये प्रशिक्षक हैं रडार पर

भोलानाथ सिंह (कुश्ती), मधुकांत पाठक (लॉन बॉल), संजय कुमार शर्मा व सुमिर कुमार शर्मा (दोनों ताइक्वांडो), एल प्रदीप कुमार व शैलेन्द्र कुमार दुबे (दोनों वुशू), संजय उत्तेकर (डाइविंग), अजित कुमार सिंह, बी के जेना व डीजी मूर्ती (तीनों मुक्केबाजी), गणेश कोश्यारी (कयाकिंग-कैनोइंग).