Sports Jharkhand
12 साल पहले वरिष्ठ IAS एन एन सिन्हा की संदिग्ध भूमिका की जांच के लिए निगरानी ब्यूरो (एसीबी) को मिला परिवाद, अबतक शुरू नहीं हुई जांच
2019-02-07  21:49:54

sportsjharkhand.com  

SUPER EXCLUSIVE

सुशील कुमार सिंह  

रांची



34 वें राष्ट्रीय खेल के आयोजन में हुई गड़बड़ियां सामने आने से लगभग तीन साल पहले राष्ट्रीय खेल के लिए स्टेडियम व अन्य आधारभूत संरचना के निर्माण में भी बड़ी अनियमितता की बाते सामने आई है। इसकी शिकायत और निगरानी जांच के लिए 12 साल पहले एक परिवाद निगरानी ब्यूरो (अब का एसीबी) को मिला था। लेकिन इस पर  अबतक जांच नहीं शुरू हुई है।  इधर जाकर मंत्रिमंडल निगरानी विभाग की तंद्रा टूटी और उसने उन कथित आरोपों पर खेलकूद विभाग से रिपोर्ट मांगी है। कई रिमाइंडर भी भेजा है लेकिन माह दर माह बीतने के बाद भी खेलकूद विभाग ने निगरानी को रिपोर्ट और संबंधित जानकारी नहीं भेजी है। वर्ष 2006 में 16 अक्टूबर को दिल्ली के एक नेता एसपी गोस्वामी ने निगरानी ब्यूरो (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो का पूर्ववर्ती नाम) को एक परिवाद भेजा था। उसमें राष्ट्रीय खेल के लिए तैयार किए जा रहे स्टेडियमों व अन्य आधारभूत संरचनाओं के निर्माण के लिए की गई टेंडर प्रक्रिया में बरती गई अनियमितताओं को लेकर तत्कालीन विभागीय सचिव एन एन सिन्हा (वर्तमान में मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी व दिल्ली में पदस्थापित) पर बिंदुवार आरोप लगाए गए हैं और निगरानी जांच की मांग की गई है। निगरानी के एसपी ने (पत्रांक 720)  दिनांक 21 जुलाई 2015 को उप सचिव मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग को अग्रतर कार्रवाई के लिए एक पत्र लिखा था। लगभग एक साल तक फाइल मंत्रिमंडल निगरानी विभाग में रही। उसके बाद 18 अप्रैल 2016 को (पत्रांक 06/नि. वि./कला-03/2015 720 (अनु.)मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग ने खेल विभाग को पत्र लिखकर प्रतिवेदन मंतव्य सहित मांगा है। पिछले 33 महीने से फाइल पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग के सचिवालय में धूल फांक रही है।  



क्या है आरोप 

परिवाद में कहा गया है कि कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग के तत्कालीन सचिव एनएन सिन्हा नियमों-परिनियमों को ताक पर रखकर नागार्जुना कंस्ट्रक्सन कंपनी को काम दिलाने के लिए काम किए हैं। एनएन सिन्हा ने मातहत अधिकारियों पर बार-बार निर्णय बदलने के लिए दवाब डाला था। परामर्शी द्वारा तय मापदंडों को बदलने, मुख्य सचिव को दिग्भ्रमित करने समेत कई अन्य गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। 



एसीबी के तत्कालीन डीजी ने जांच का दिया था निर्देश

निगरानी ब्यूरो के तत्कालीन डीजी जगबंधु महापात्रा ने उस परिवाद (संख्या 429/06) पर जांच करने का निर्देश दिया था। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि हज़ार-दस हज़ार की घूस की रकम के साथ कनीय कर्मचारियों-अधिकारियों को रंगेहाथ पकड़ने व खुद की पीठ थापथपानेवाली निगरानी अब तक इस मामले की जांच तक शुरू नहीं कर पाई है।  नौ वर्ष बाद वर्ष 2015 में निगरानी ब्यूरो ने इस पर आगे की कार्रवाई के लिए मंत्रिमंडल निगरानी विभाग से मंतव्य मांगा। विभाग ने निगरानी ब्यूरो से नौ वर्ष तक इस मामले को दबाए रखने का कारण पूछा और इसके लिए जिम्मेवार कौन हैं यह भी बताने को कहा। ब्यूरो ने इंस्पेक्टर सरयू बैठा और डीएसपी  रेणुबाला को इसके लिए जिम्मेवार ठहराया। अब मंत्रिमंडल निगरानी विभाग ने इन दोनों के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रस्ताव देने को कहा है। 



क्या है पूरा मामला ?

राष्ट्रीय खेल आयोजन के लिए स्टेडियमों सहित अन्य आधारभूत संरचना निर्माण के लिए मई 2005 में टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई थी । 28 मई 2005 तक निविदा आमंत्रित की गई। इससे पहले परामर्शी के तौर पर मैनहर्ट ने टेंडर बिड्स के लिए मार्किंग सिस्टम बनाया जिसे एनएन सिन्हा की अध्यक्षता में बनी एक कमिटी ने सर्वसम्मति से पारित किया। इसपर भवन निर्माण विभाग के विशेष सचिव की सहमति भी 7 जुन 2006 को प्राप्त कर ली गयी। 20 जुन को टेंडर कमिटी ने बिड्स की समीक्षा की और पांच बिडर्स के दस्तावेज मार्किंग के लिए वैध पाया। पांच कंपनियों की मार्किंग की गयी और तय मापदंड के अनुसार 70 प्रतिशत से कम अंक आने के कारण नागार्जुना कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड को अयोग्य घोषित कर दिया गया। नागार्जुना को 49 प्रतिशत अंक मिले थे। इसके बाद येन-केन-प्रकारेण नियमों से प्रतिकूल जाकर, बार-बार निविदा समिति के फैसलों को दरकिनार कर नागार्जुना को तकनीकी तौर पर योग्य कराया और अंततः काम भी एलाॅट किया गया।



...बंद कीजिए ये सब...बंद कीजिये... : एन एन सिन्हा

sportsjharkhand.com ने जब इस मसले पर वरिष्ठ IAS अधिकारी एन एन सिन्हा का पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने उल्टे प्रश्नों की झड़ी लगा दी। आप कौन हैं ? किस अखबार से हैं ? क्या मामला है ? जवाब मिलने के बाद उन्होंने कहा कि ये पूरा मामला कुछ लोगों के कारण उठवाया जा रहा है। बंद कीजिए ये सब... बंद कीजिए...! और फोन काट दिया।