Sports Jharkhand
खेलो इंडिया में झारखंड मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने में नाकामयाब, आखिर क्यों ?
2019-01-19  21:31:02

sportsjharkhand.com टीम

रांची


1 स्वर्ण, 4 रजत व 1 कांस्य बस यही जीत पाए हैं हम पुणे में खेली गई खेलो इंडिया यूथ गेम्स में। आखिर क्यों ?


पिछले 18 साल में जो बोया है हमने ( सरकार+खेल विभाग+खेल संघ+खेल प्रशासक+खेल पत्रकार+खेल प्रेमी+बड़ी-बड़ी कंपनियां व उनके CSR का भारी-भरकम खेल बजट + खेल के दलाल) जो बोया है, वही ना काटेंगे।


पिछले 15 सालों में खेल व खिलाड़ी के लिए हमारी (हमारी मतलब ऊपरवाली परिभाषा) प्राथमिकता रही है \"आयोजन\"। जी हां आयोजन, सिर्फ आयोजन ! लेकिन किसके लिए ?


क्या झारखंड के खिलाड़ियों के लिए ? 

नहीं


झारखंड के प्रशिक्षकों के लिए ? 

नहीं


फिर किसके लिए ?

सिर्फ और सिर्फ कमीशन के लिए, यही सच है। कमीशन किसके लिए ? खिलाड़ियों के लिए ? नहीं, हमारे (ऊपरोक्त परिभाषा) लिए ही ना ? 

होटल में कमीशन, खेल सामान की खरीदारी में कमीशन, खाने में कमीशन, तकनीकी पदाधिकारियों को मिलनेवाले मानदेय में कमीशन, TA/DA में कमीशन, कमीशन...कमीशन... और सिर्फ कमीशन !


फिर भी खिलाड़ियों से पदकों की उम्मीद

क्यों ?


इन 18 सालों में खिलाड़ियों के उत्थान की बात करनेवाला खेल संघ का स्वयम्भू प्रशासक/दलाल स्कूटर-मोटरसाइकिल पर चलते-चलते कब उड़ने लगे पता ही नहीं चला। खिलाड़ी आज भी ठोंगा, चौमिन, हड़िया बनाने और बेचने को विवश हैं। सरकार से अनुदान लेने के वक़्त जो एका खेल संघ दिखाते हैं, उसका एक प्रतिशत भी झारखंड के खिलाड़ियों के प्रति दिखाई होती तो तस्वीर बहुत कुछ बदल गई होती।


गोवा में राष्ट्रीय खेल होना है, झारखंड के कुछ खेल के दलाल झारखंडी खिलाड़ियों के नाम पर \'बाहरी\' खिलाड़ियों का आयात कर चुके हैं। जब झारखंडी खिलाड़ियों की हकमारी कर पदकों का तमगा नकद उगलेंगे तो पैसों की बंदरबांट तय है। 


तो आईये हम (ऊपरोक्त परिभाषा) मंथन करें, आत्मचिंतन करें। शायद विष के अलावा 1 प्रतिशत अमृत भी झारखंड के खिलाड़ियों के लिए निकल आए।